मुकेश गुप्ता की रिपोर्ट।
बागली वन रेंज की लापरवाही आई सामने
अपने बांस के कागज बनते सुना होगा लेकिन बगली रेंज में कागजों में बांस पौधे उगा दिए गए हैं।

लाखों रुपए के गबन का मामला आया सामने ।
पर्यावरण सुरक्षा समिति ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग ।
बांस से कागज बनते हैं,
यह तो देखा गया है, लेकिन कागजो में बांस उग आए यह सुनकर अचंभा लगेगा।

हाँ हम बिलकुल सही कह रहे हैं।
लगभग 50 लाख रूपये की राशि
बागली रेंज की पलासी बीट के कक्ष क्रमांक 750 में बांस वृक्षारोपण योजना अंतर्गत प्रथम वर्ष 2025 में खर्च हो गए। उक्त योजना के तहत जुन 2025 में सुरक्षा जाली के साथ 50 हैक्टेयर में 31250 बांस के पौधे लगना थे, लेकिन हमारे संवाददाता ने दिनांक 11 सितम्बर को मोके पर जाकर पड़ताल की तो वहाँ पर बमुश्किल पांच हजार पौधे भी नहीं दिखे।

पौधे के ढेर अलग अलग तीन चार स्थानों पर जुन माह से ही पड़े हुए है जो पड़े पड़े नष्ट होने की स्थिति में है।
वन विभाग से जुड़े जानकारों ने बताया कि किसी भी प्लांटेशन के पहले पौधों को मवेशियों से बचाने के लिए सुरक्षा जाली लगाई जाती है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि सुरक्षा जाली का ही अता पता नहीं है, जिसके कारण पुरे प्लांटेशन क्षेत्र में मवेशी चर रहे हैं। उक्त राशि में पौधारोपण के साथ साथ चेक डेम, डबरी निर्माण, कंटूर, निंदाई, गुडाई आदि कार्य भी होना थे, जो महज कागजों में ही दिख रहे हैं। इधर इसी प्लांटेशन क्षेत्र में किसी अतिक्रमणकारी ने अतिक्रमण कर मक्का व लाल तुवर की फसल तक की बुआई कर दी ओर वन विभाग देखते रह गया। कुल मिलाकर उक्त प्लांटेशन के कार्य में भारी भष्ट्राचार व घोटाला हुआ है, जिसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच आवश्यक है, साथ ही विभाग की घौर लापरवाही भी सामने आ रही है।
बेशकीमती सागौन पेड़ों की अवैध कटाई बेखोफ जारी।

इसी कक्ष में जब उक्त प्लांटेशन की पड़ताल करने हमारे संवाददाता पहूँचे तो पर्यावरण नुकसानी की बेहद चिंताजनक स्थिति देखने को मिली।
पलासी बीट के कक्ष क्रमांक 750 में आज व कल में सागौन के बेशकीमती 70 से अधिक पेड़ अवैध रूप से कट गए। सुत्रों के मुताबिक बदमाशों द्वारा अतिक्रमण के उद्देश्य से उक्त अवैध कटाई की जा रही है। उक्त दोनों मामलो की जानकारी हमारे संवाददाता मुकेश गुप्ता ने सीसीएफ उज्जैन मस्तराम बघेल व देवास सीएफ बी के पटेल को विडियो, फोटो के साथ मोके पर से ही दी, जिसे दोनों अधिकारियों ने गंभीरता पूर्वक संज्ञान में लेते हुए तत्काल जांच कराए जाने के लिए कहा है। इधर पर्यावरण सुरक्षा समिति से जुड़े सदस्यों ने उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच की मांग आला अधिकारियों से की है।
